खफा हुए वोह हमसे...
मना तो लेते ही हम,
कहां गए वोह हमदम... जो प्यार के पैगाम लाया करते थे ||
लिखने की आदत हो गई उन्हें ... पढ़ तो लेते ही हम ,
क्यूँ लिखना उनका हुआ कम... जो बेहतरीन नज्में लिख जाया करते थे ||
मौसिकी से इश्क होने लगा उन्हें... गा तो लेते ही हम ,
आज धुन में उनकी लगा न दम... जो गीतों को सुरों से सजाया करते थे ||
वोह मुडके देखे भी न हमें... यह सह तो लेते हम ,
क्यूँ वहीँ सब हुआ ख़तम... जहाँ रोज़ मिलने जाया करते थे ||
कहां गए वोह हमदम... जो प्यार के पैगाम लाया करते थे ||
लिखने की आदत हो गई उन्हें ... पढ़ तो लेते ही हम ,
क्यूँ लिखना उनका हुआ कम... जो बेहतरीन नज्में लिख जाया करते थे ||
मौसिकी से इश्क होने लगा उन्हें... गा तो लेते ही हम ,
आज धुन में उनकी लगा न दम... जो गीतों को सुरों से सजाया करते थे ||
वोह मुडके देखे भी न हमें... यह सह तो लेते हम ,
क्यूँ वहीँ सब हुआ ख़तम... जहाँ रोज़ मिलने जाया करते थे ||
acha hai :)
ReplyDeletethanks ;)
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