Thursday, 15 December 2011

अनकही


दिल  ने  तुझे  याद  किया , इक  प्यारा  सा  नगमा  गाके 
गानों  से  गर  इज़हार  होता , गाना  कतैय न  छोड़ते  हम ||

सबमें  दिखा  तेरा  ही  साया , तुझे  याद  बार  बार  करके 
याद  करने  से  गर  इज़हार  होता , याद  करना  कतैय  न  छोड़ते  हम ||

कान  हमेशा  तैयार  रहे , तेरी  आहटों  की  आहट  सुनने 
यह  सुनने  से  गर  इज़हार  होता , सुनना  कतैय  न  छोड़ते  हम ||

तेरा  इंतज़ार  किया , जाम  पे  जाम  भर  भरके 
इंतज़ार  से  गर  इज़हार  होता , इंतज़ार  करना  कतैय  न  छोड़ते  हम ||

नैन  आस  लगाये  रहते  तेरी , इक  झलक  को  देखने 
देखने  से  गर  इज़हार  होता , देखना  कतैय  न  छोड़ते  हम ||

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