Thursday, 29 December 2011

I, me and Myself


ये गुलशन है घर मेरा , हर चमन से वाकिफ़ हूँ मैं
इस डाल से उस डाल तक फुदकती चली हूँ मैं ||

आँधी - तूफान जब भी आये , डालियों के साये में छुपी हूँ मैं
थम जाने पर उनके थिरकते हुए गाती चली हूँ मैं ||

फूलों के खिलने पे बरसात में , हर रंग के फूल पे खेली हूँ मैं
मुरझा जाने पर उनके कुछ रूठ सी गयी हूँ मैं ||

ढूँढना चाहा जब भी मुझे , इसी गुलिस्तान में मिली हूँ मैं
पहचान मेरी अब जान लो , इस गुलशन की बुलबुल हूँ मैं ||
 

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