गली में उनकी नज़रें लगाये रहते हैं
कभी न कभी उनका दीदार हो जाए ||
खिड़की पे आते ही उनके दिल झूमता है ऐसे
जैसे पतझड़ में बहार हो जाए ||
लाख दफ़ा कोशिश की हमने
पर अपना हाल - ए -दिल बयां न कर पाए ||
दुआ करते हैं खुदा से
मेरे जनाज़े से पहले उनकी डोली न उठ जाए ||
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