ख़्वाबों में तेरे डूबे थे , दिल में अजब झंकार हुई
मिलने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
यादों को कैद करना भी चाहा , इक कोरा कागज़ और सियाही लेके
तेरे हुस्न पे लिखने की ख्वाहिश जगी फिरसे, जब भी तुझे याद किया ||
तेरी जुल्फों की वोह महक , हावी हुई कुछ ऐसे
उनमें खोने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
कड़कती धूप के इशारों पे , पलकें तेरी झुकी कुछ ऐसे
साया बनने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
हाथ में हाथ डाले हुए , कंगन घूमता रहता कलाई पे तेरी
हमकदम बनने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
तारीफ सुनते ही , लाल होते तेरे गाल उसी पल
उन्हें छूने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
कागज़ तो कोरा ही रह गया , सियाही भी सूख गयी है अब
ख़त लिखने की ख्वाहिश अधूरी रही ऐसे , जब भी तुझे याद किया ||
मिलने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
यादों को कैद करना भी चाहा , इक कोरा कागज़ और सियाही लेके
तेरे हुस्न पे लिखने की ख्वाहिश जगी फिरसे, जब भी तुझे याद किया ||
तेरी जुल्फों की वोह महक , हावी हुई कुछ ऐसे
उनमें खोने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
कड़कती धूप के इशारों पे , पलकें तेरी झुकी कुछ ऐसे
साया बनने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
हाथ में हाथ डाले हुए , कंगन घूमता रहता कलाई पे तेरी
हमकदम बनने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
तारीफ सुनते ही , लाल होते तेरे गाल उसी पल
उन्हें छूने की ख्वाहिश जगी फिरसे , जब भी तुझे याद किया ||
कागज़ तो कोरा ही रह गया , सियाही भी सूख गयी है अब
ख़त लिखने की ख्वाहिश अधूरी रही ऐसे , जब भी तुझे याद किया ||
Bohat acche !!!!!!!!!!!!!!
ReplyDeleteshukriya:)
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