Wednesday, 7 December 2011

कल और आज


जन्म  लिया  था  दुनिया  से  बेखबर 
माँ  की  गोद में  बचपन  बीत  गया 
कभी  ग़म  थे  तो  कभी  थी  ख़ुशी 
कुछ  पता  न  चला  जब  तक  बड़ा  हो  गया 

आज  ज़िन्दगी  ले  आई  है  किस  मोड़   पर  
उस  माँ  के  आँचल  से  दूर 
जिसने  सीचा  है  हमें  बचपन  से  
समझकर  एक  नाज़ुक  सा  फूल 

दुनिया  को  समझना  चाहा  था  हमने 
पर  यह  बड़ी  मतलबी  निकली 
हर  मोड़  पे  देखा  जो  हमने 
हमें  ही  पार  कर  गुजरी 

जाने  कहाँ  गए  वोह  लम्हे 
जहाँ  हमेशा  खुश  रहते  थे  हम 
कोई  लौटा  दे  वोह  प्यारे  प्यारे  दिन 
जहाँ  आज  की  ख़ुशी  से  बढकर  थे  उन  दिनों  के  गम ||

2 comments:

  1. kal aur aaj ki kashmakash me ab phas gaya hoon main,
    samay thamta nahi magar tham gaya hoon main,
    kaise ab samay ki ye nayya par karoon,
    kaise majhdhar me main apne agaj par aitbar karoon

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