पाप, दोष, घृणा, अहिंसा, यह सब, देख सकता है हर कोई
देखो तो कुछ ऐसा देखो कि आँखों को तुमपे नाज़ हो
देखो तो कुछ ऐसा देखो कि आँखों को तुमपे नाज़ हो
गीतों के अल्फाज़ों को लेके, गुनगुना सकता है हर कोई
गाओ तो कुछ ऐसा गाओ कि गीतों को तुमपे नाज़ हो
गाओ तो कुछ ऐसा गाओ कि गीतों को तुमपे नाज़ हो
घुँघरू बांधके पैरों में, थिरक सकता है हर कोई
नाचो तो कुछ ऐसा नाचो कि घुंघरुओं को तुमपे नाज़ हो
नाचो तो कुछ ऐसा नाचो कि घुंघरुओं को तुमपे नाज़ हो
मिज़ाज रहता है रंगीन हरदम, दावा कर सकता है हर कोई
रंगीन बनो तो कुछ ऐसे बनो कि रंगों को तुमपे नाज़ हो
रंगीन बनो तो कुछ ऐसे बनो कि रंगों को तुमपे नाज़ हो
प्यार में पड़ना, वादे करना, कर सकता है हर कोई
चाहो तो कुछ ऐसे चाहो कि मोहब्बत को तुमपे नाज़ हो
चाहो तो कुछ ऐसे चाहो कि मोहब्बत को तुमपे नाज़ हो
बोलने को तो बहुत कुछ बोल सकता है हर कोई
कहो तो कुछ ऐसा कहो कि लफ़्ज़ों को तुमपे नाज़ हो
कहो तो कुछ ऐसा कहो कि लफ़्ज़ों को तुमपे नाज़ हो
कागज़ की परतों को लेके, भर सकता है लफ़्ज़ों से हर कोई
लिखो तो कुछ ऐसा लिखो कि कलम को तुमपे नाज़ हो
लिखो तो कुछ ऐसा लिखो कि कलम को तुमपे नाज़ हो
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