लाल रंग की गाडी थी उसकी, चलाता रहा जिसे दिन रात
सुनने की फुर्सत भी न थी उसे, मैं बस पुकारती रह गई |
सुनने की फुर्सत भी न थी उसे, मैं बस पुकारती रह गई |
काला चशमा आँखों पर उसकी, क्या खूब जच रहा था
देखने की फुर्सत भी न थी उसे, मैं बस ताकती रह गई |
देखने की फुर्सत भी न थी उसे, मैं बस ताकती रह गई |
चमकती गाडी देख उसकी, चलाने का मन किया मेरा भी
देने की फुर्सत भी न थी उसे, मैं बस फुसफुसाती रह गई |
देने की फुर्सत भी न थी उसे, मैं बस फुसफुसाती रह गई |
खिलौने पे बैठ एक खिलौना, कर रहा था शानदार सवारी
जलती रही मैं क्यूँ उससे, सोच मैं बस मुस्कुराती रह गई |