Wednesday, 30 May 2012

खिलौना


लाल रंग की गाडी थी उसकीचलाता रहा जिसे दिन रात
सुनने की फुर्सत भी  थी उसेमैं बस पुकारती रह गई |

काला चशमा आँखों पर उसकीक्या खूब जच रहा था
देखने की फुर्सत भी  थी उसेमैं बस ताकती रह गई |

चमकती गाडी देख उसकीचलाने का मन किया मेरा भी
देने की फुर्सत भी  थी उसेमैं बस फुसफुसाती रह गई  |

खिलौने पे बैठ एक खिलौना,  कर रहा था शानदार सवारी 
जलती रही मैं क्यूँ उससेसोच मैं बस मुस्कुराती रह गई |



Friday, 18 May 2012

यादें


जान  पहचानख्वाबों में फिर भी आती है
सपने तो बहुत हुए, अब बस दीदार बाकी है

आँखें जो खुलती हैं, वोह ही वोह नज़र आती है 
देखना तो बहुत हुआ, अब बस चाहत बाकी है

इस दिल की हर बात, उसके कानों तक जाती है 
कहना तो बहुत हुआ, अब बस सुनना बाकी है

अपनी इस मोहब्बत को, क्या वोह भी आगे बढाती है?
प्यार तो बहुत हुआ, अब बस अंजाम बाकी है

वापस मुड़े उसके ही कदम, फिर क्या मुझे समझाती है!
इंतज़ार तो बहुत हुआ, अब बस इंतकाम बाकी है

क़त्ल कर उस जान को, खुद से ही अब घिन्न  आती है  
बदला तो बहुत हुआ, अब बस उसकी यादें बाकी है

तेरे नाम


धक-धक करती हुईजुदा हुई वोह मुझसे 
जिंदा रहूंगी मैं भीगर आई वोह तेरे काम 
दिल तो था ही, अब धड़कन भी हो गई तेरे नाम

डरी हुई सहमी सी थी वोहछूकर गुज़र गई जो कबसे 
छोडके मेरा घर आँगनकर गई वोह मुझे बदनाम 
जान तो थी ही, अब सांसें भी हो गई तेरे नाम

मुझ जैसी ही थी वोह, जुदा हो गई जो मुझसे 
देखती रही मैं उसकोपहुँच गई वोह तेरे धाम
मैं तो थी ही, अब रूह भी हो गई तेरे नाम

तुम


आँखें बंद करूँ तो फिर वही नज़र आता है
कोई इंसान हो या हो धुएँ में लिपटे एक ख्याल तुम |

एक मूरत दिखती है दूर खड़ी रहती है जो
कोई हक़ीकत हो या हो मेरे मन का ख्वाब तुम  |

उलझा हुआ खुद में एक साया नज़र आता है
कोई सच्चाई हो या हो मेरी आँखों का सराब तुम |

दिल बार-बार मुझे ला खड़ा करता है यहीं 
सवाल यही करता है कि आख़िर कौन हो तुम  
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Wednesday, 9 May 2012

फ़क्र



पाप, दोष, घृणा, अहिंसायह सबदेख सकता है हर कोई
देखो तो कुछ ऐसा देखो कि आँखों को तुमपे नाज़ हो

गीतों के अल्फाज़ों को लेकेगुनगुना सकता है हर कोई
गाओ तो कुछ ऐसा गाओ कि गीतों को तुमपे नाज़ हो

घुँघरू बांधके पैरों मेंथिरक सकता है हर कोई
नाचो तो कुछ ऐसा नाचो कि घुंघरुओं को तुमपे नाज़ हो

मिज़ाज रहता है रंगीन हरदमदावा कर सकता है हर कोई
रंगीन बनो तो कुछ ऐसे बनो कि रंगों को तुमपे नाज़ हो

प्यार में पड़नावादे करनाकर सकता है हर कोई
चाहो तो कुछ ऐसे चाहो कि मोहब्बत को तुमपे नाज़ हो

बोलने को तो बहुत कुछ बोल सकता है हर कोई
कहो तो कुछ ऐसा कहो कि लफ़्ज़ों को तुमपे नाज़ हो

कागज़ की परतों को लेकेभर सकता है लफ़्ज़ों से हर कोई 
लिखो तो कुछ ऐसा लिखो  कि  कलम को तुमपे नाज़ हो  

Friday, 4 May 2012

आँखें

किसके ख्यालों में खोई रहती हैं यहकिसकी परछाई दिखती है इन आँखों में 
सब देख सकती हैं वही आँखें बसजिनका अक्स बसा हुआ है इन्ही आँखों में

Thursday, 3 May 2012

कमी


गमों की बारिश थी, ज़िन्दगी के सफ़र में 
रोना जब चाहा तो आंसुओं की कमी हो गई
तनहा थी रातें भी, नैनों के आँगन में
सोना जब चाहा तो नींद की कमी हो गई
झुरियों के नक़्शे थे, चेहरे की दीवारों पे
मुस्कुराना जब चाहा तो खुशियों की कमी हो गई
कहना था बहुत कुछ, मुरझाये इन होंठों से
बोलना जब चाहा तो लफ़्ज़ों की कमी हो गई
चंद लम्हे ज़िन्दगी से अपने, बाँटने थे किसी अपने से
बुलाना जब चाहा तो अपनों की कमी हो गई
ज़िन्दगी प्यार का गीत है, सुना था यह भी कहीं
गुनगुनाना जब चाहा तो गीतों की कमी हो गई
कुछ भी नहीं ज़िन्दगी, गर मोहब्बत न हो उसमें
दिल लगाना जब चाहा तो दिलदार की कमी हो गई
क्यूँ बनाई यह दुनिया, क्या मख्सद था उसका
सवाल जब करना चाहा तो भगवान् की कमी हो गई