जनम लिया सबके
ही चेहरे
उतर गए
लड़की क्यूँ आई अपने घर में !
लड़के की कामना में वोह भूल गए
लड़की ही सही, इंसान ही हूँ मैं ||
पाल - पोस के बड़ा तो किया
पर हमेशा ही रखा गया एक फर्क |
बेटे के लाड में वोह भूल गए
बेटी ही सही, इंसान ही हूँ मैं ||
बूढ़े से शादी करवाई गयी
दहेज की क्यूंकि न थी कोई भी शर्त |
लालच की आड में वोह भूल गए
बोझ नहीं, इंसान ही हूँ मैं ||
ससुराल में भी मिला न सुख
सुलूक हुआ बद्जातों सा |
खेलके मेरे जज्बातों से वोह भूल गए
खिलौना नहीं, इंसान ही हूँ मैं ||
जाने से उनके बढ़ गया यह तूफ़ान
तानों पे ताने मारे गए |
घर से निकालते हुए वोह भूल गए
बेवा ही सही, इंसान ही हूँ मैं ||
उम्मीद तुझसे ही थी कुछ
पर तू भी सब कुछ देखता गया |
दुःख है कि तू भी भूल गया
भगवान नहीं, इंसान ही हूँ मैं ||
लड़की क्यूँ आई अपने घर में !
लड़के की कामना में वोह भूल गए
लड़की ही सही, इंसान ही हूँ मैं ||
पाल - पोस के बड़ा तो किया
पर हमेशा ही रखा गया एक फर्क |
बेटे के लाड में वोह भूल गए
बेटी ही सही, इंसान ही हूँ मैं ||
बूढ़े से शादी करवाई गयी
दहेज की क्यूंकि न थी कोई भी शर्त |
लालच की आड में वोह भूल गए
बोझ नहीं, इंसान ही हूँ मैं ||
ससुराल में भी मिला न सुख
सुलूक हुआ बद्जातों सा |
खेलके मेरे जज्बातों से वोह भूल गए
खिलौना नहीं, इंसान ही हूँ मैं ||
जाने से उनके बढ़ गया यह तूफ़ान
तानों पे ताने मारे गए |
घर से निकालते हुए वोह भूल गए
बेवा ही सही, इंसान ही हूँ मैं ||
उम्मीद तुझसे ही थी कुछ
पर तू भी सब कुछ देखता गया |
दुःख है कि तू भी भूल गया
भगवान नहीं, इंसान ही हूँ मैं ||
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