लफ़्ज़ों की कमी होने लगती है, रूठके जब जाता है तू
जुदाई का गम सताता है तब, जब जब जाने की बात करता है तू ||
दरिया के साहिल पे बैठे, हुई थी जो हमारी गुफ्तगू
याद वोह आता है तब, जब जब जाने की बात करता है तू ||
दिल में बसी है जो तस्वीर तेरी, सजाये रखूं उसे या हटा दूं
सिलसिला यह चलता है तब, जब जब जाने की बात करता है तू ||
इक कोना है दिल में तेरे भी, बसती है जिसमें मेरी रूह
आसरा वोह मेरा बनता है तब, जब जब जाने की बात करता है तू ||
जितने क़रीब है दिल के धड़कन, उससे कहीं ज़्यादा क़रीब
है तू
फ़ासला यह बढ़ता है तब, जब जब जाने की बात करता है तू ||
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