लब जैसे सिल से जाते हैं, ख़ामोशी घोंटके है पी जाते
फिरसे सवाल होंठों पर हैं आते, आप जब तशरीफ़ लाते हैं ||
हँसना ही हम भूल जाते हैं, जब जब आप नहीं आते
मुस्कुराहट से हम खिल हैं जाते, आप जब तशरीफ़ लाते हैं ||
मोहब्बत के फूलों को सजाके, किताबों में रखे हैं जाते
किस्से यह भी हैं बन जाते, आप जब तशरीफ़ लाते हैं ||
जुदा खुद से ही हो जाते हैं, आपको क़रीब जो नहीं पाते
फिरसे जुडके एक हैं बन जाते, आप जब तशरीफ़ लाते हैं ||
यादों को सिरहाने रख, इंतज़ार हम कर नहीं पाते
फिरसे रुखसत होने के ख़याल हैं सताते, आप जब तशरीफ़ लाते हैं ||
दिल के यह रिश्ते हैं, कैसे हम इनको दबाते
जिंदा होने का यह अहसास हैं दिलाते, आप जब तशरीफ़ लाते हैं ||
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