चेहरा था मुरझाया सा, मन में था एक ही सवाल
कैसे यह दो दिन ख़तम हुए, लम्बे होते काश, जैसे एक साल
दिमाग तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था सोमवार ||
कैसे यह दो दिन ख़तम हुए, लम्बे होते काश, जैसे एक साल
दिमाग तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था सोमवार ||
एक दिन तो अब था निकल गया, पर बाकी थे अब अगले चार
एक दिन को क्यूँ बर्बाद किया, अब लग गए कामों के अम्बार
काम तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था मंगलवार ||
एक दिन को क्यूँ बर्बाद किया, अब लग गए कामों के अम्बार
काम तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था मंगलवार ||
दिन गिनने की आदत सी लगी, दो दिन ही हैं अब आज के बाद
वीकेंड वर्किंग था पिछली बार, जायेंगे कहाँ अब की बार
सोचना तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था बुद्धवार ||
वीकेंड वर्किंग था पिछली बार, जायेंगे कहाँ अब की बार
सोचना तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था बुद्धवार ||
ख़ुशी चेहरे से थी झलक रही, क्या चढ़ा था इश्क का बुख़ार ?
ग़लत समझे थे लोग , दरअसल, निखर रहा था छुट्टी से प्यार
यह प्यार तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था ब्रहस्पतिवार ||
ग़लत समझे थे लोग , दरअसल, निखर रहा था छुट्टी से प्यार
यह प्यार तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था ब्रहस्पतिवार ||
मोहब्बतें हमने हैं देखी कईं, खुद इश्क में रहे हमेशा ही गवार
आज मौसम है कुछ बदला सा, आई है चारों तरफ़ बहार
बरसात का होना लाज़मी था, क्यूंकि वोह दिन था शुक्रवार ||
आज मौसम है कुछ बदला सा, आई है चारों तरफ़ बहार
बरसात का होना लाज़मी था, क्यूंकि वोह दिन था शुक्रवार ||
आखिर वोह दिन अब आ ही गया, जिसके लिए थे इतने बेक़रार
एक दिन में जी ली हर ख़ुशी, इस दिन की है यह ख़ास बात
जीना तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था शनिवार ||
एक दिन में जी ली हर ख़ुशी, इस दिन की है यह ख़ास बात
जीना तो शुरू करना था, क्यूंकि वोह दिन था शनिवार ||
अजब सा है यह दिन भी, कबसे था इसका इंतज़ार
दिन गिन गिन हफ्ता बीत गया, कल फिरसे अब होगा दीदार
चिंता तो शुरू होनी थी, क्यूंकि वोह दिन था रविवार ||
दिन गिन गिन हफ्ता बीत गया, कल फिरसे अब होगा दीदार
चिंता तो शुरू होनी थी, क्यूंकि वोह दिन था रविवार ||
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