Wednesday, 8 October 2014

हमेशा साथ रहने के लिये आना


अब जब आओ तो हमेशा साथ रहने के लिये आना
सांसों को अपनी मेरी सांसों में मिलाने के लिये आना
 
गीत कईं गुनगुनाते है तुम्हारी यादों में
ख्वाब कईं सजा रखें है इन आँखों में
इन ख्वाबों को हक़ीक़त में बदलने के लिये आना

इश्क़ में तुम्हारे कईं शम्में जला रखी हैं
स्वागत में तुम्हारे, घर की सजावट कर रखी है
इस सजावट पे चार चाँद लगाने के लिये आना

मोहब्बत में तुम्हारी, हज़ारों दिये जलाये हैं
इंतज़ार में तुम्हारे, पलकें बिछाये बैठे हैं
इस इंतज़ार को मुस्तकिल खतम करने के लिये आना

दीदार हो जाये तुम्हारा, यह आस लेके बैठे हैं
तुमसे मिलने को साज सिंगार करके बैठे हैं
इस अधूरे सिंगार को पूरा करने के लिये आना


 

Wednesday, 1 October 2014

मेरी मोहब्बत

किसी अलग सी दुनिया में, सितारों से कईं दूर, आसमानों में लिपटी हुई मिली
पाने की चाह में उसे, शुरू किया यह सफर, हवाओं से लड़ आगे बढ़ती मैं चली
न बलाओं का डर, न माथे पे शिकन, बिन सोचे कायनातें पार करती मैं गई
कहना था उसे कितनी अज़ीज़ है इस दिल को, मीलों दूर से मैं आवाज़ें देती रही
जुदाई का ग़म था हर पल मगर, हिम्मत न छोड़ उसे मिलने बस चलती मैं रही
मुस्कुराहट खिल उठी जब खुली यह आँखें, मेरी मोहब्बत मेरे सिरहाने सोते हुए मिली

 

Tuesday, 23 September 2014

शिक़ायत

शिक़ायत भी क्या करें दिलदार से,
गर शिक़ायत का मतलब उन्हें पता ही नहीं |

खुद से ही मन बना बैठे हैं,
यहाँ की उनको परवाह ही नहीं |

कहते हैं इश्क़ है हमसे बेहद,
इस दिल को क़ुबूल कभी किया ही नहीं |

ज़ख्मों की चादरें दी हर पल हमें,
और कहते खून तो कभी दिखा ही नहीं |

तन्हाई

चंन्द लम्हे तन्हाई में बिताने से करार आया |
बातें खुद से ही करने पे रूबरू तो हो पाया ||
इल्म न था ज़रा भी बहार की दुनिया का |
भरी महफ़िल में भी खुद को अकेला पाया ||