चंन्द लम्हे तन्हाई में बिताने से करार आया |
बातें खुद से ही करने पे रूबरू तो हो पाया ||
इल्म न था ज़रा भी बहार की दुनिया का |
भरी महफ़िल में भी खुद को अकेला पाया ||
बातें खुद से ही करने पे रूबरू तो हो पाया ||
इल्म न था ज़रा भी बहार की दुनिया का |
भरी महफ़िल में भी खुद को अकेला पाया ||
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