Wednesday, 8 October 2014

हमेशा साथ रहने के लिये आना


अब जब आओ तो हमेशा साथ रहने के लिये आना
सांसों को अपनी मेरी सांसों में मिलाने के लिये आना
 
गीत कईं गुनगुनाते है तुम्हारी यादों में
ख्वाब कईं सजा रखें है इन आँखों में
इन ख्वाबों को हक़ीक़त में बदलने के लिये आना

इश्क़ में तुम्हारे कईं शम्में जला रखी हैं
स्वागत में तुम्हारे, घर की सजावट कर रखी है
इस सजावट पे चार चाँद लगाने के लिये आना

मोहब्बत में तुम्हारी, हज़ारों दिये जलाये हैं
इंतज़ार में तुम्हारे, पलकें बिछाये बैठे हैं
इस इंतज़ार को मुस्तकिल खतम करने के लिये आना

दीदार हो जाये तुम्हारा, यह आस लेके बैठे हैं
तुमसे मिलने को साज सिंगार करके बैठे हैं
इस अधूरे सिंगार को पूरा करने के लिये आना


 

No comments:

Post a Comment