किसी अलग सी दुनिया में, सितारों से कईं दूर, आसमानों में लिपटी हुई मिली
पाने की चाह में उसे, शुरू किया यह सफर, हवाओं से लड़ आगे बढ़ती मैं चली
न बलाओं का डर, न माथे पे शिकन, बिन सोचे कायनातें पार करती मैं गई
कहना था उसे कितनी अज़ीज़ है इस दिल को, मीलों दूर से मैं आवाज़ें देती रही
जुदाई का ग़म था हर पल मगर, हिम्मत न छोड़ उसे मिलने बस चलती मैं रही
मुस्कुराहट खिल उठी जब खुली यह आँखें, मेरी मोहब्बत मेरे सिरहाने सोते हुए मिली
पाने की चाह में उसे, शुरू किया यह सफर, हवाओं से लड़ आगे बढ़ती मैं चली
न बलाओं का डर, न माथे पे शिकन, बिन सोचे कायनातें पार करती मैं गई
कहना था उसे कितनी अज़ीज़ है इस दिल को, मीलों दूर से मैं आवाज़ें देती रही
जुदाई का ग़म था हर पल मगर, हिम्मत न छोड़ उसे मिलने बस चलती मैं रही
मुस्कुराहट खिल उठी जब खुली यह आँखें, मेरी मोहब्बत मेरे सिरहाने सोते हुए मिली
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