जनम लिया सबके चेहरों पे रौनक थी
मुबारक हो लड़का हुआ है
खुश तो मैं भी बहुत हुआ
सोचा आख़िर लड़का हूँ मैं ||
बहना मेरी थी इक प्यारी सी
खुश रखना उसको मेरी ज़िम्मेदारी थी
उसकी मांगों को पूरा करता रहा
सोचा आखिर भाई हूँ मैं ||
शैतानियाँ हो चाहे किसी की भी
इलज़ाम मुझी पे लगते थे
चुप रहके मैं भी सहता गया\
सोचा इन सब का हकदार हूँ मैं ||
आशाभरी नज़रों से देखा करते
बड़ा होना इक भूल सी लगी
फ़र्ज़ अपने पूरा करता गया
सोचा आखिर बेटा हूँ मैं ||
शादी हुई दुल्हन मिली
मन को इक सुकून मिला
माँ-बीवी की जंग में फिर उलझता गया
सोचा इन सब का भागीदार हूँ मैं ||
बीवी से नोक-झोंक लगी मामूली सी
बच्चों की जंग का जब सिलसिला चला
उनके साथ मैं भी बच्चा बनता गया
सोचा इनका पापा हूँ मैं ||
पहचान खुद की भूलने लगा
खुद ही खुद से दूर होता रहा
ज़िन्दगी की दौड़ में पिसता गया
सोचा एक आम आदमी हूँ मैं ||
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