Friday, 3 February 2012

लड़का


जनम लिया सबके चेहरों पे रौनक थी 
मुबारक हो लड़का हुआ है 
खुश तो मैं भी बहुत हुआ 
सोचा आख़िर लड़का हूँ मैं ||

बहना मेरी थी इक प्यारी सी 
खुश रखना उसको मेरी ज़िम्मेदारी थी 
उसकी मांगों को पूरा करता रहा 
सोचा आखिर भाई हूँ मैं ||

शैतानियाँ हो चाहे किसी की भी 
इलज़ाम मुझी पे लगते थे 
चुप रहके मैं भी सहता गया\
सोचा इन सब का हकदार हूँ मैं ||

आशाभरी नज़रों से देखा करते 
बड़ा होना इक भूल सी लगी 
फ़र्ज़ अपने पूरा करता गया 
सोचा आखिर बेटा हूँ मैं ||

शादी हुई दुल्हन मिली 
मन को इक सुकून मिला 
माँ-बीवी की जंग में फिर उलझता गया 
सोचा इन सब का भागीदार हूँ मैं ||

बीवी से नोक-झोंक लगी मामूली सी 
बच्चों की जंग का जब सिलसिला चला 
उनके साथ मैं भी बच्चा बनता गया 
सोचा इनका पापा हूँ मैं ||

पहचान खुद की भूलने लगा 
खुद ही खुद से दूर होता रहा 
ज़िन्दगी की दौड़ में पिसता गया
सोचा एक आम आदमी हूँ मैं || 

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