Friday, 27 April 2012

दोस्ती और एक सफ़र


चुन लिए कुछ पल हमने अपनी ज़िन्दगी से कल
सोचा इन्हें बना दें यादगार हमेशा के लिए
कितना खुशगवार होगा आने वाला कल
कह नहीं सकते तो जियें यह पल सिर्फ अपने ही लिए ||
उठके, भरी नींद में आँखें मूंदते हुए
सुबह होने से पहले ही चल पड़े कदम
टपरी पे चाय की चुसकियों के साथ
होने लगा इस हसीं सफ़र का जनम ||
कुछ गाने कुछ नगमे, कुछ नए कुछ पुराने
कुछ छेड-छाड कुछ मस्ती, कुछ रोके कुछ हँसके
कुछ गालियाँ कुछ गप-शप, कुछ सोके कुछ जग के
न कोई गिले न शिकवे, दोस्त होते ही हैं कुछ हट के ||
हँसते गाते , घूमते घुमाते
सुबह से जाने कब शाम हो गई
वक़्त भी गुज़रता गया कुछ यूँ
जैसे बिन पानी बरसात हो गई ||
गाते गुनगुनाते चलता रहा कारवाँ
थी चाहे शाम या था सवेरा
लौटने का मन न था किसी का भी
दिल में था बस यादों का बसेरा ||
दोस्तों से बढ़कर कुछ भी नहीं यहाँ
कितना सच है यह क्या खूब ख्याल है
खुद को पहचानने का ज़रिया हैं वोह
कहा जाए तो आईने से भी ज्यादा कमाल है ||
P.S. Had an amazing trip with friends this weekend. This one is dedicated to them:)

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