घर और घरवालों से कोसों दूर, धरती माँ की गोद में है रहते
हम सब की तरह था उनका भी बचपन, थे वोह भी आम इंसान
ओहदा उनका बढ़ गया तब, फैसला जाने का किया जब
कंधों पे उठा चले ज़िम्मेदारी, पीछे छोड़ हर एक जज़्बात
खाने में तरह तरह के पकवान, थाली में गरमा गरम परोसके
यह सब तो ख्वाबों में ही मिलते, खाने को कुछ मिल जाये तो हो उसका अहसान
घरवालों की याद जब सताती, एक दूजे को हैं सँभालते
आपस में है प्यार से रहते, एक दूजे का रखते हैं पूरा ध्यान
सेना में जाना है बहुत आसान, सबका है यही मानना
कोई करके देखे तो जाने, कहने को तो है बहुत आसान
देश की सरहदों पे तैनात, हर मुसीबत को वहीँ है रोकते
ताकि रह सके हम चैन से, क्या है हमारे दिलों में उनके लिए सम्मान?
अपनी जान की परवाह न कर, दुश्मनों से कभी नहीं घबराते
देशभक्ति है जिनमें कूट कूट के भरी, ऐसे होते हैं सेना के जवान
हम सब की तरह था उनका भी बचपन, थे वोह भी आम इंसान
ओहदा उनका बढ़ गया तब, फैसला जाने का किया जब
कंधों पे उठा चले ज़िम्मेदारी, पीछे छोड़ हर एक जज़्बात
खाने में तरह तरह के पकवान, थाली में गरमा गरम परोसके
यह सब तो ख्वाबों में ही मिलते, खाने को कुछ मिल जाये तो हो उसका अहसान
घरवालों की याद जब सताती, एक दूजे को हैं सँभालते
आपस में है प्यार से रहते, एक दूजे का रखते हैं पूरा ध्यान
सेना में जाना है बहुत आसान, सबका है यही मानना
कोई करके देखे तो जाने, कहने को तो है बहुत आसान
देश की सरहदों पे तैनात, हर मुसीबत को वहीँ है रोकते
ताकि रह सके हम चैन से, क्या है हमारे दिलों में उनके लिए सम्मान?
अपनी जान की परवाह न कर, दुश्मनों से कभी नहीं घबराते
देशभक्ति है जिनमें कूट कूट के भरी, ऐसे होते हैं सेना के जवान
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