शिक़ायत भी क्या करें दिलदार से,
गर शिक़ायत का मतलब उन्हें पता ही नहीं |
खुद से ही मन बना बैठे हैं,
यहाँ की उनको परवाह ही नहीं |
कहते हैं इश्क़ है हमसे बेहद,
इस दिल को क़ुबूल कभी किया ही नहीं |
ज़ख्मों की चादरें दी हर पल हमें,
और कहते खून तो कभी दिखा ही नहीं |
गर शिक़ायत का मतलब उन्हें पता ही नहीं |
खुद से ही मन बना बैठे हैं,
यहाँ की उनको परवाह ही नहीं |
कहते हैं इश्क़ है हमसे बेहद,
इस दिल को क़ुबूल कभी किया ही नहीं |
ज़ख्मों की चादरें दी हर पल हमें,
और कहते खून तो कभी दिखा ही नहीं |